भारत के अस्त्र-संग्राम में विश्व के महान लेखकों एवं विद्धानों ने कई प्रकार से अपना योगदान दिया है। इसमें भारत के लोगों के साथ व्यक्तिगत रूप से या योग के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है। इनमें से रूस के महान लेखक लियो टाल्सटाय के प्रमुख रूप में भारतीय समाज के सेवियों, विद्वानों और लेखकों से लेकर लंबे समय तक के लेखकों का रिकॉर्ड बनाया गया है। यह वैज्ञानिक भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई समुद्रों में जन-प्रेरणा का स्रोत बना था। तलस्ताय भारतीय संस्कृति और उनकी पत्रिका से भली-भोति परिचित थे। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दशकों में वेदों, उपनिषदों और महाकाव्यों का अध्ययन-मनन किया था। टालस्टाय ने भारतीय संस्कृति के तत्वों का रूसी भाषा में वर्णन करते हुए उन्हें रूस में भी लोकप्रिय बना दिया।
टालस्टाय के लेखन को भारतीय भी गंभीरता से पढ़ते थे क्योंकि उनके उपन्यासों और अन्य लेखन में गुलामी के विरूद्ध आवाज उठाई जाती थी। टालस्टाय की पुस्तकें फ्रांस और ब्रिटेन से भी प्रकाशित होती थीं। इसलिए भारत में भी लोकप्रिय थीं। टालस्टाय के घर यास्याना-पोल्याना के ग्रंथालय में आज भी भारत के बारे में कई ग्रंथ, पत्रिकाएं, अखबार और पत्र आदि रखे हुए हैं। टालस्टाय की डायरी में भारत सम्बंधी प्रकाशनों की सूची तथा महाभारत, रामायण और हितोपदेश की कई सूक्तियॉ लिखी मिलती हैं।
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